Haridwar :हरिद्वार जनपद के बहादराबाद क्षेत्र में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का तृतीय दिवस श्रद्धा, भक्ति और अध्यात्म के रंग में पूरी तरह रंगा नजर आया। इस पावन अवसर पर कथा वाचक पूज्य वासुदेव दास जी महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, भक्त प्रह्लाद की भक्ति तथा श्रीनारद जी की शिक्षाओं का सरल, सरस और हृदयस्पर्शी वर्णन किया।

कथा स्थल पर आज भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को अत्यंत भव्य बना दिया। दूर-दूर से आए श्रद्धालु कथा पंडाल में एकत्र हुए और पूज्य महाराज जी की अमृतवाणी का श्रवण कर आध्यात्मिक सुख की अनुभूति प्राप्त की। श्रद्धालुओं ने मंत्रमुग्ध होकर कथा का रसपान किया और वातावरण “जय श्रीकृष्ण”, “हरि नाम संकीर्तन” जैसे जयघोषों से गूंज उठा।
वासुदेव दास जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, जीवन की पूर्णता का मार्ग है। उन्होंने कथा के माध्यम से जीवन में भक्ति, सेवा और सदाचार के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताया कि कलियुग में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण ही सबसे सरल और प्रभावशाली मोक्ष का उपाय है।
कथा के दौरान संगीतमय भजनों की प्रस्तुति, महाराज जी के भावपूर्ण प्रवचन सभी को एक अद्भुत आध्यात्मिक यात्रा पर ले गए। श्रद्धालुजन भक्ति में इतने लीन हुए कि कुछ की आंखों से अश्रुधारा बहती रही, तो कुछ नृत्य करते हुए प्रभु प्रेम में डूबे दिखाई दिए।
इस प्रकार भागवत कथा न केवल आत्मा को शुद्ध करने का माध्यम बनी, बल्कि समाज में प्रेम, करुणा और सच्चे धर्म की भावना को भी जागृत करने वाली प्रेरणादायक सिद्ध हो रही है।
