Uttarakhand Ankita Murder Case, 30 मई 2025 बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे कोर्ट) शुक्रवार को फैसला सुनाएगा। 18 सितंबर 2022 को वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या कर उसका शव चीला शक्ति नहर में फेंक दिया गया था। घटना के एक सप्ताह बाद उसका शव बरामद हुआ था। अब लगभग दो साल और आठ महीने बाद इस मामले में न्याय का फैसला आने जा रहा है।
अदालत में 30 जनवरी 2023 को इस केस की पहली सुनवाई हुई थी। एसआईटी जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने 500 पेज का आरोपपत्र दाखिल किया था। मामले में तीनों आरोपियों—वनंत्रा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, कर्मचारी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—के खिलाफ आरोप तय किए गए। 28 मार्च 2023 से अभियोजन पक्ष की गवाही शुरू हुई और कुल 47 गवाहों को अदालत में परीक्षित कराया गया, जबकि एसआईटी द्वारा कुल 97 गवाह बनाए गए थे।
बीती 19 मई को विशेष लोक अभियोजक अवनीश नेगी द्वारा बचाव पक्ष की बहस का जवाब देकर अंतिम बहस पूरी की गई। इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 30 मई की तिथि निर्धारित की।
कोटद्वार में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था
कोटद्वार कोर्ट परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। गढ़वाल मंडल के विभिन्न जनपदों से भारी पुलिस बल, अधिकारियों और डेढ़ कंपनी पीएसी के जवानों को तैनात किया गया है। कोतवाल रमेश तनवार के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था के लिए कई दौर की बैठकें और मॉक ड्रिल आयोजित की गई हैं। किसी भी बाहरी व्यक्ति को अदालत परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
निषेधाज्ञा लागू, चार मजिस्ट्रेट तैनात
एसडीएम कोटद्वार सोहन सिंह सैनी ने कोर्ट परिसर के 200 मीटर के दायरे में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। इस क्षेत्र में समूह में प्रवेश, नारेबाजी और प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु चार मजिस्ट्रेट—तहसीलदार साक्षी उपाध्याय, एआरटीओ ज्योति शंकर मिश्रा, अजय अष्टवाल और मनोहर सिंह नेगी—को तैनात किया है।
एसडीएम सैनी ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के अंतर्गत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि यह प्रतिबंध अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मियों पर लागू नहीं होगा।
कोटद्वार, ऋषिकेश, पौड़ी और देहरादून समेत राज्यभर में लोग इस फैसले को लेकर संवेदनशील हैं। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने हत्यारोपियों को कड़ी सजा देने की मांग करते हुए आंदोलन किए हैं। ऐसे में आज का दिन उत्तराखंड के न्याय इतिहास में एक निर्णायक क्षण के रूप में देखा जा रहा है
