गंगा दशहरा के पावन अवसर पर गंग नहर को प्रदूषण मुक्त बनाने की मांग को लेकर प्रयास फाउंडेशन ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने उप जिलाधिकारी रुड़की के माध्यम से मुख्यमंत्री और राज्यपाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में गंग नहर में गिर रहे गंदे और दूषित नालों को तत्काल बंद कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई गई।
संस्था के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व सदस्य वन एवं पर्यावरण उत्तराखंड सरकार विकास त्यागी ने कहा कि मां गंगा करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं, लेकिन इसके बावजूद जगह-जगह जहरीले और दूषित नालों का पानी सीधे गंगा और गंग नहर में छोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर उदासीन बने हुए हैं, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने इसे श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ बताया।ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य विनय कुमार सैनी ने सरकार से तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि जिन स्थानों पर दूषित पानी गंग नहर में छोड़ा जा रहा है, वहां संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी कर निकासी बंद कराई जाए।
कोषाध्यक्ष विक्रांत पुंडीर ने कहा कि गंग नहर में गिरने वाले सभी चिन्हित नालों को टैपिंग के जरिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि गंदे पानी का शोधन हो सके। साथ ही एनजीटी के आदेशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने सिंचाई विभाग, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम गठित कर मौके पर निरीक्षण कराने की भी मांग उठाई।
