कहीं गिरी दीवार तो कहीं दरकती छत, शिक्षा के मंदिर बने खतरे का सबब
जर्जर भवन के डर से जूनियर स्कूल में सिमटी छात्र संख्या, महज 6 बच्चे शेष; दो साल से गुहार लगा रहे ग्रामीणों का सब्र टूटा
रीठा साहिब (चम्पावत)। लधिया घाटी के चल्थियां गांव में शिक्षा के मंदिर अब मासूमों के लिए खतरे की घंटी बनते जा रहे हैं। जिन स्कूलों में बच्चों का भविष्य संवारा जाना चाहिए, वहां जर्जर दीवारें और दरकती छतें हर पल किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं। हालात ऐसे हैं कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय की मुख्य दीवार पिछले दो वर्षों से धराशायी पड़ी है, जबकि राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन इस कदर जर्जर हो चुका है कि अभिभावक अपने बच्चों को वहां भेजने से कतरा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं।
छत गिरने का खौफ, चार किलोमीटर दूर पढ़ने को मजबूर बच्चे
सामाजिक कार्यकर्ता मोहन चंद्र टिटगाईं ने विद्यालयों की बदहाल स्थिति पर गहरी नाराजगी जताते हुए बताया कि उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत कभी भी भरभराकर गिर सकती है। भूस्खलन के चलते भवन की नींव तक खुल चुकी है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर डरे अभिभावकों ने अपने बच्चों को चार किलोमीटर दूर भिंगराड़ा इंटर कॉलेज भेजना शुरू कर दिया है। नतीजा यह है कि कभी बच्चों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले जूनियर विद्यालय में अब महज छह छात्र रह गए हैं।
38 बच्चों का भविष्य दांव पर, शिक्षकों की मेहनत पर भारी बदहाल व्यवस्था
हैरानी की बात यह है कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय चल्थियां में वर्तमान में 38 बच्चे अध्ययनरत हैं, जो लधिया घाटी के विद्यालयों में सर्वाधिक बताई जा रही छात्र संख्या है। ग्रामीण विद्यालय के शिक्षकों की मेहनत और शिक्षा व्यवस्था की सराहना करते नहीं थकते, लेकिन दो साल से गिरी मुख्य दीवार बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक बच्चों का भविष्य संवारने में जुटे हैं, मगर विभागीय उदासीनता उनके प्रयासों पर पानी फेर रही है।
दो साल से गुहार, अब आंदोलन की हुंकार
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम प्रधान प्रतिनिधि और स्थानीय लोग पिछले दो वर्षों से शिक्षा विभाग, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं, लेकिन आश्वासनों के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगा। अब ग्रामीणों का धैर्य जवाब देने लगा है। उन्होंने प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि विद्यालय भवनों की मरम्मत और बच्चों की सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए, तो वे बच्चों के साथ मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन एवं अनशन करने को बाध्य होंगे।
ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि यदि जर्जर विद्यालय भवनों के कारण कोई अप्रिय घटना घटती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।
