ज्वालापुर। हौंसले जिनके ऊंचे होते हैं, वही पत्थरों से रास्ते बना देते हैं। जी हां कहते हैं, राजनीति में हर कदम पर नए मोड़ होते हैं। कभी उम्मीदों की ऊंचाई तो कभी निराशा का गहरा साया। लेकिन जज्बा हो, तो हालात के थपेड़े भी आपको डिगा नहीं सकते। ज्वालापुर की राजनीति में ऐसे ही एं संघर्ष की कहानी गढ़ रहे हैं शिवम श्रोत्रिय जिन्होंने भाजपा से गहरी निष्ठा के बावजूद पार्टी टिकट न मिलने पर अपनी पत्नी तन्मयी श्रोत्रिय को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनावी रण में उतारा है। शिवम श्रोत्रिय का नाम आते ही एक ऐसे मिलनसार, सुलझे हुए और जनता के दिलों में बसने वाले शख्स की छवि उभरती है, जिन्होंने हमेशा लोगों के सुख-दुख में साथ खड़ा होकर उनकी सेवा की है। उनका व्यवहार और कार्यकुशलता ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है, जिससे उन्होंने वर्षो तक क्षेत्र की जनता का दिल जीता है। यही कारण है कि अपनी पत्नी तन्मयी श्रोत्रिय के नाम से पार्षद पद के लिए मैदान में उतारें हैं, तो उन्हें हर वर्ग से खुला समर्थन मिल रहा है। चाहे युवा हो, महिलाएं हो या फिर बुजुर्ग हो।
भाजपा ने तोड़ा भरोसा, जनता पर छोड़ा इंसाफ
भाजपा पार्टी का सिंबल न मिलने से आहत शिवम श्रोत्रिय ने खुद को हारा हुआ नहीं माना। उन्होंने जनता के इंसाफ पर भरोसा जताते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। उनकी यह जंग केवल कुर्सी की नहीं बल्कि उनके सम्मान और वर्षो की निष्ठा का प्रश्न बन गई है। वह कहते हैं, मैने हमेशा क्षेत्र की सेवा की है, अब जनता पर छोड़ा है कि वह मेरे साथ कितना न्याय करती है।

राजनीतिक सफर: संघर्ष सफलता तक…
शिवम श्रोत्रिय का राजनीति सफर एक मिसाल है। भाजपा में मण्डल युवा र्मोचा के महामंत्री रहे साथ ही संघ के कार्यकर्ता के रूप में भी कार्य करते रहे हैं। शिवम श्रोत्रिय की कड़ी मेहनत से क्षेत्रवासियों का दिल जीत रहे हैं। अवगत कराते चले कि श्रोत्रिय के दादा जी एक दिग्गज नेता रहे हैं। जिनके पास केन्द्र नेतृत्व के बड़े से बड़े दिग्गज नेता आते थे।

जनता का आशीर्वाद और विरोधियों में खलबली..
जब भी शिवम श्रोत्रिय क्षेत्र की गलियों में कदम रखते हैं, तो लोगों की भीड़ उन्हें घेर लेती है। उनकी विनम्रता और हर घर-परिवार से जुड़ाव ने उन्हें जनता का चहेता बना दिया है। लोग कहते हैं कि वह हमेशा हमारी समस्याएं सुनते हैं और हल करने के लिए दौड़ पड़ते हैं।
शिवम श्रोत्रिय का प्रभावी अंदाल
चुनावी अभियान में शिवम श्रोत्रिय का अंदाज हर किसी को प्रभावित कर रहा है। वह विकास के मुद्दों पर बात करते हैं, अपनी योजनाओं का खाका खींचते हैं, और क्षेत्र के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की बात करते हैं। उनकी पत्नी तन्मया श्रोत्रिय जो महिलाओं की समस्याओं को समझती हैं, हर जगह जनता का समर्थन जुटा रही हैं।

विरोधियों के खेमे में बेचैनी…
शिवम श्रोत्रिय की बढ़ती लोकप्रियता से उनके विराधी परेशान हैं। उनके राजनीतिक अनुभव और जनता से मजबूत जुड़ाव के चलते चुनावी समीकरण लगातार नजर आ रहे हैं। लोग चर्चा कर रहे हैं कि क्या भाजपा ने उनहें दरकिनार कर बड़ी गलती कर दी….?

दिलचस्प मोड़ पर पहुंचा चुनाव…
ज्वालापुर का यह चुनाव दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ पार्टी सिंबल के भरोसे मैदान में उतरे उम्मीदवार हैं, तो दूसरी तरफ शिवम श्रोत्रिय जैसे संघर्षशील नेता, जिन्होंने अपने दम पर जनता का दिल जीता है। अब देखना यह होगा कि जनता किसे अपना आशीर्वाद देती है। क्या शिवम श्रोत्रिय अपने अनुभव और सेवा भावना के बलबूते एक और जीत का परचम लहराएंगे…? या फिर इस बार समीकरण कुछ और कहानी कहेंगे…..? कहानी का अंत चाहे जैसा भी हो एक बात तय है- इस बार ज्वालापुर की सियासी हवा में शिवम श्रोत्रिय के हौसले और संघर्ष खुशबू जरूर घुली है।

