देहरादून — उत्तराखंड सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की ओर बढ़ गई है। देहरादून में आयोजित मुख्य सेवक संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सौर स्वरोजगार योजना से लाभान्वित महिलाओं से संवाद किया और उनके अनुभवों को सुना।
मुख्यमंत्री धामी ने कार्यक्रम में घोषणा करते हुए कहा कि अब सौर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने वाली महिलाओं को “सौर सखी” के नाम से जाना जाएगा, जो पूरे राज्य में महिला सशक्तिकरण का नया प्रतीक बनेंगी।
● “सौर सखी” बनेंगी प्रेरणा का स्रोत
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन महिलाओं ने सौर ऊर्जा से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में साहसिक कदम उठाया है, उनके अनुभवों को राज्यभर में साझा किया जाएगा ताकि अन्य महिलाएं भी इससे प्रेरित होकर नई ऊर्जा के साथ आत्मनिर्भरता की राह पकड़ें।
उन्होंने कहा कि यह नाम सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि उन महिलाओं की संघर्ष और सफलता की कहानी का सम्मान है, जो अपनी मेहनत से उत्तराखंड को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जा रही हैं।
● प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में मिल रही नई दिशा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनके कुशल नेतृत्व और दूरदर्शिता में शुरू की गई सौर स्वरोजगार योजना आज उत्तराखंड की युवा पीढ़ी और मातृशक्ति के लिए “विकसित उत्तराखंड, विकसित भारत” के संकल्प को साकार करने का सशक्त माध्यम बन चुकी है।
यह योजना न केवल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है, बल्कि रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है।
● सुझावों से बनेगी योजना और प्रभावी
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभवों को सुना और सुझावों को संकलित किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन जमीनी अनुभवों और सुझावों के आधार पर योजना को और अधिक जनहितैषी और व्यावहारिक बनाया जाएगा।
● महिला सशक्तिकरण को मिलेगा नया आयाम
राज्य सरकार के अनुसार, आने वाले समय में “सौर सखियों” को प्रशिक्षित कर अन्य क्षेत्रों में भी उपयोगी बनाया जाएगा, जिससे वे तकनीकी दक्षता के साथ गांव-गांव जाकर लोगों को स्वच्छ ऊर्जा की जानकारी दे सकें और स्वरोजगार के अवसर उत्पन्न करें।
📌 निष्कर्ष: “सौर सखी” केवल एक नाम नहीं, बल्कि बदलते उत्तराखंड की वह तस्वीर है, जहां महिलाएं केवल ऊर्जा की उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्पादक और प्रेरक भी बन रही हैं। यह पहल उत्तराखंड को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण के पथ पर मजबूती से आगे बढ़ा रही है।
