हरिद्वार। धर्म और सेवा की भूमि हरिद्वार एक बार फिर ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनी जब ‘वात्सल्य गंगा आश्रय’ के भव्य लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस पुण्य अवसर पर उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी तथा दिल्ली की मुख्यमंत्री माननीय श्रीमती रेखा गुप्ता ने विशेष रूप से भाग लिया। साथ ही परम पूजनीय महामंडलेश्वर परमानंद जी महाराज सहित अनेक पूज्य संतों की गरिमामयी उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को आध्यात्मिक दिव्यता प्रदान की।
कार्यक्रम की शुरुआत पतित पावनी माँ गंगा की आराधना से हुई, जिसमें समस्त प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की प्रार्थना की गई। इसके पश्चात अतिथियों द्वारा वात्सल्य गंगा आश्रय का उद्घाटन किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा, “यह आश्रय स्थल केवल एक भवन नहीं, बल्कि समाज की उन बेटियों के लिए नया जीवन है जो किसी कारणवश आश्रय से वंचित रही हैं। उत्तराखण्ड सरकार, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सनातन संस्कृति की रक्षा व सेवा कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।”

साध्वी ऋतंभरा के नेतृत्व में संचालित वात्सल्य सेवा प्रकल्प को मंच पर मौजूद सभी संतों और गणमान्य अतिथियों ने समाज सेवा का प्रकाशस्तंभ बताया। यह प्रकल्प निराश्रित बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण जीवन प्रदान करने की दिशा में एक क्रांतिकारी प्रयास है, जिसने हजारों जीवनों को सकारात्मक दिशा दी है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि “साध्वी ऋतंभरा जी जैसे संतों का यह सेवा भाव समाज को एक नई चेतना प्रदान करता है। यह प्रकल्प महिलाओं को गरिमा के साथ पुनः समाज में स्थापित करने का माध्यम बन रहा है।”
समारोह में उपस्थित पूज्य संतों ने भी इस कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि यह करुणा, सेवा और संस्कृति के पुनर्निर्माण का प्रतीक है।
अंत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी मानसिक विकृतियों के विरुद्ध उत्तराखण्ड सरकार पूरी कठोरता से कदम उठा रही है, ताकि राज्य की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सके।

‘वात्सल्य गंगा आश्रय’ अब केवल एक संस्था नहीं, बल्कि जीवन, संवेदना और आशा का प्रतीक बनकर उभर रहा है जो समाज की आत्मा को जोड़ने का काम कर रहा है।
