शहरी विकास सचिव को सौंपी गई 100 पृष्ठों से अधिक की रिपोर्ट, कार्रवाई की संस्तुति
Haridwar:हरिद्वार नगर निगम द्वारा किए गए बहुचर्चित भूमि घोटाले की जांच पूरी हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गठित जांच टीम के अधिकारी, आईएएस रणवीर सिंह ने इस प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट शहरी विकास सचिव नितेश झा को सौंप दी है। रिपोर्ट में दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी की संलिप्तता उजागर हुई है। हालांकि, अधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार, 100 से अधिक पृष्ठों की इस रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सराय गांव में खरीदी गई लगभग 50 करोड़ की भूमि में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। यह जमीन नगर निगम द्वारा उस मुआवजे की राशि से खरीदी गई थी जो उसे रिंग रोड निर्माण के दौरान प्राप्त हुई थी। आरोप है कि जहां मार्केट रेट बहुत कम था, वहां सर्किल रेट के आधार पर ऊंचे दामों पर जमीन खरीदी गई।
नगर निगम ने इस भूमि पर 56 दुकानों का निर्माण कराया, लेकिन मामले के प्रकाश में आने पर प्रारंभिक जांच में अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद कई अधिकारियों पर गाज गिरी — प्रभारी सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण, कर एवं राजस्व निरीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट और अवर अभियंता दिनेश चंद्र कांडपाल को निलंबित कर दिया गया। सेवानिवृत्त संपत्ति लिपिक वेदपाल का सेवा विस्तार समाप्त कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति दी गई। वरिष्ठ वित्त अधिकारी निकिता बिष्ट से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
जांच के दौरान आईएएस रणवीर सिंह ने हरिद्वार के जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी और एसडीएम अजयवीर सिंह से पूछताछ की। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भूमि खरीद की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं हुआ और भू-उपयोग परिवर्तन संबंधी प्रक्रियाओं में भी संदेहास्पद कार्यशैली अपनाई गई।
शहरी विकास सचिव नितेश झा ने जांच रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की है और आगे की कार्रवाई के लिए शासन स्तर पर मंथन शुरू हो गया है। मामले में उच्च अधिकारियों के संलिप्त होने के चलते यह रिपोर्ट शासन के लिए बेहद संवेदनशील मानी जा रही है।
